दशहरा घर पर कैसे मनाएँ

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दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। दशहरा — विजयादशमी — नवरात्रि को पूरा करता है। कलश उठाया जाता है, नौ दिन से उग रहे जौ काटकर बाँटे जाते हैं, पत्ते एक-दूसरे को दिए जाते हैं, और बहुत से घरों में कोई नई चीज़ जान-बूझकर इसी दिन शुरू की जाती है। नीचे का क्रम आम है; समय के लिए इस साल का पंचांग देखें।

Steps

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    सुबह आख़िरी आरती करें

    वही जो नौ दिन रोज़ किया — हल्दी-कुमकुम, फूल, आरती। यह उन नौ दिनों का अंत है, इसलिए जल्दबाज़ी में न करें।

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    उगे हुए जौ काट लें

    थाली के हरे अंकुर जड़ समेत न उखाड़ें, कैंची से काटें। ये घर के लोगों को दिए जाते हैं — टोपी में, पगड़ी में या कान के पीछे लगाने की परंपरा कई घरों में है। इन्हें फेंका नहीं जाता।

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    कलश उठाएँ

    कलश का पानी तुलसी या घर के किसी पौधे में डालें। नारियल फोड़कर प्रसाद बाँटें। मिट्टी गमले में डालें — कूड़े में न डालें।

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    पत्ते दें और लें

    शमी या आपटा के पत्ते “सोना” कहकर एक-दूसरे को दिए जाते हैं और बड़ों के पैर छुए जाते हैं। ये पेड़ कम होते जा रहे हैं, इसलिए टहनियाँ न तोड़ें — जितने पत्ते चाहिए उतने ही लें।

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    शस्त्र, वाहन और औज़ारों की पूजा

    घर में जिससे काम होता है उसकी पूजा की जाती है — बही, कंप्यूटर, औज़ार, गाड़ी, दुकान का गल्ला। जहाँ सरस्वती पूजा की परंपरा है वहाँ किताबें और वाद्य भी।

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    सीमोल्लंघन

    शाम को गाँव या मोहल्ले की सीमा पार करना — सीमोल्लंघन। आजकल यह प्रतीकात्मक है: घर से निकलकर पास के मंदिर या मैदान तक जाना। रावण दहन हो तो वह इसके बाद।

जौ और मिट्टी का क्या करें

जौ काटकर घर के लोगों को दें; बचे हुए देवी के पास रखें। जड़ समेत उखाड़ने पर वे सूख जाते हैं और दिन भर भी नहीं टिकते।

मिट्टी और नारियल की खोल पौधे या गमले में। नौ दिन जिसकी पूजा की, उसे कूड़े में डालने से अधिकतर घरों में जान-बूझकर बचा जाता है।

नई शुरुआत का दिन

दशहरा साढ़े तीन मुहूर्तों में गिना जाता है, इसलिए नई चीज़, नया काम या नई पढ़ाई इसी दिन शुरू की जाती है।

इसका एक सीधा अर्थ यह भी है — महीने भर से जो टाल रहे हैं, वह आज शुरू कर दें। जो समिति अगले साल की पहली बैठक इसी दिन कर लेती है, वह आम तौर पर समय पर तैयार होती है।

Common questions

कलश नवमी को उठाएँ या दशहरे को?
दोनों होता है। कुछ घरों में नवमी के हवन के बाद, अधिकतर घरों में दशहरे की सुबह। घर की परंपरा निभाएँ; दोनों प्रचलित हैं।
शमी या आपटा के पत्ते न मिलें तो?
कई जगह कचनार के पत्ते इस्तेमाल किए जाते हैं। ये पेड़ कम होते जा रहे हैं, इसलिए टहनियाँ तोड़ने से बचें और गिने-चुने पत्ते ही लें।
दशहरे का मुहूर्त कौन सा है?
विजयादशमी को पूरा दिन शुभ माना जाता है, और विजय मुहूर्त दोपहर के बाद पड़ता है। सही समय हर साल और हर जगह बदलता है, इसलिए यहाँ नहीं दिया गया — पंचांग देखें।
फ़्लैट में सीमोल्लंघन कैसे करें?
प्रतीकात्मक काफ़ी है — शाम को घर से निकलकर पास के मंदिर या मैदान तक जाना। बात सीमा पार करने की है, दूरी की नहीं।